ऐ मेरे देश की रचनाकारों,
नमन तुम्हें मैं करता हूं ।
परिवर्तन की इस बेला में,
आस तुम्ही से करता हूं ।।
तुम जो चाहो बदल हो सकते, सृष्टि के व्यापार को ।
हर व्यक्ति के अंदर बैठे , दुश्चिंतन व्यवहार को ।।
तुम ही भावों के हो समंदर , निर्माता साकार हो ।
दिशा तुम्ही तो दे सकते हो, उन बेबस लाचार को ।।
कवि रवि दोनों की शक्ति , का मैं वंदन करता हूं ।
परिवर्तन की इस बेला में, आज तुम्ही से करता हूं ।।१।।
आज बहुतों कविता केवल , हंसी का भंडार है ।
मनोरंजन ही मात्र वहां पर, जीवन का न सार है ।।
आज तमस की ओर है जाता, दिखता ये संसार है ।
फिर पत्नी प्रेमी ही आज क्यों, कविता का आधार है ।।
संस्कारमय जीवन कर दे , गीत वह गाया करता हूं ।
परिवर्तन की इस बेला में, आस तुम्ही से करता हूं ।।२।।
अपनी रचना वह लिखो कि , दुनियां को झकझोर दे ।
हर युवा जो नशा छोड़कर , जीवन अपना मोड़ दें ।।
फैशन अब आकर्षण बना , यह भी तो सब छोड़ दें।
काम- वासना के चंगुल से , अपना नाता तोड़ दें ।।
पाश्चात्य में जाती दुनियां , उनको राह दिखाता हूं ।
परिवर्तन की इस बेला में ,आस तुम्ही से करता हूं ।।३।।
© बसंत कुमार ऋतुराज
No comments:
Post a Comment