मेरा नाम है,
मुझे घमंड़ नहीं इस बात का
मैंने ख़ुद की पहचान बनाई,
औरों से अलग बनाई।
सुकून हैं मुझे इस बात का।।
देर जरूर लगी
पर कुछ तो बन गई।
यूहीं कहीं अंधेरों में
नहीं खो गईं,
ढूंढ लिया मैंने अपना वजूद।
जीत ली मैंने
अपने अस्तित्व की लड़ाई।
छोटी ही सही,
मैने अपनी पहचान बनाई।
गुमनाम भी थी कभी
मैं
मेरे अपनो के लिए ।
आज ज़माना भी दंग हैं,
फलक पर मेरा नाम देखकर।
ज़िंदगी क्या है, कितनी हैं,
बस मेरा वजूद,
मेरी पहचान कायम रहे,
कोशिश इतनी हैं।
गिराने तो मुझे सब आए,
थामने कोई नहीं आया,
ए ज़िंदगी, शुक्रिया
तूने मुझे कुछ तो सिखाया।
कीर्ति की दिल से
✍🏻
कीर्ति देवानी
Nagpur Maharashtra
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