नदिया की धार
देखो पर्वत किनार,
बहे नदिया की धार,
खूबसूरत नजारा है,
वहीं घर भी हमारा है,
इसी नदिया के पार,
रहें साजन हमार,
एक पुल ही तो चारा है,
मिलने का सहारा है,
पेंड़ कचनार के,
हरसिंगार के,
बाग बगिया सॅवारा है,
वहीं घर भी हमारा है,
देखो बतखों का जोड़ा,
मोर नाचे निगोड़ा,
कैसा दृश्य ये प्यारा है,
वहीं घर भी हमारा है।
~आभा गुप्ता
इंदौर, मध्यप्रदेश
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