मेरी माटी
मेरी वाणी में महक है,
मेरी माटी की, ऐसी पावन वसुंधरा मेरी।
मेरा भारत है प्रेम का मधुबन,
ताजा गुलशन वसुंधरा मेरी।
आज हम जिस जगह पे आए हैं,
दिल से उसको नमन मै करती हूँ।
मेरे शब्दों मे वर्ण भारत के,
कतरा-कतरा लहू मे उसका है।
मेरी साँसों की ये जो धड़कन है,
इसमें छाया की तरह है,
वसुंधरा मेरी।
जाने कितनी कलम बनी इसमें,
कितने वीरो की वीर गाथा है।
सर झुका है, झुका रहेगा सदा,
एक तोहफा है,
वसुंधरा मेरी।
जन्म जितने भी दे मेरे मालिक,
गोद मुझको मेरे भारत कि मिले।
और कोई नहीं तमन्ना है,
मेरी साँसों में ही बसे हरदम,
मेरी माटी वसुंधरा मेरी।
ऐसी पावन वसुंधरा मेरी।
– सूर्यबाला मिश्रा
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