पिता हमारे देव जगत के,
देवी होती है माता।
एक-दूजे के गुणसूत्र से,
शिशु जगत में आता।।
शिशु जगत में आता,
मात-पिता में कोई कम नहीं?
स्वास्थ्य रूपी शिशु के लिए,
ज्यों-जरूरी दूध व दही।।
कहैं 'भवन' कहने के लिए,
माता हो भले अपराजिता।
पर,पुत्र के दीर्घ-दुःख में,
याद आता है केवल पिता।।
(कवि लेखक व शिक्षक)
ग्राम व पोस्ट -बरगदवा हरैया
क्षेत्र-फरेंदा जनपद महराजगंज उत्तर प्रदेश
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