बहुत किया मनचाहा तूने,अब है तेरी बारी
जीवो को मारा है तूने,तुझे पड़ेगा भारी
तुझे झेलनी होगी मौसम,की ये मारा मारी
पेड़ों को काटा है तूने,तपी धरा है सारी।।
गर्मी का तांडव झेलेगा,ये कर्मों की भरनी
कैसा शोर मचा रखा है ,ये है तेरी करनी
अभी तो तपना शुरु हुआ है,तुझे बहुत है सहना
मान भूल को अपनी मानुष,नहीं पड़े फिर कहना।।
करें नहीं पेड़ों की रक्षा,तुझको दिया नजारा
भगवन ने भेजा कुदरत का,सबको मौसम प्यारा
काटा पेड़ों को मानव खग,कैसे करें बसेरा
किसने माना खग के घर को,मानव ने ही घेरा।।
एक बार तो मौसम का भी,जरा निहार नजारा
कैसे आई हरियाली क्या,तूने कभी विचारा
फल फूल छांव देते तुझको ,हरदम बने सहारा
काटा जाता जब पेड़ों को,तू क्यों करें किनारा।।
आज बचा लेगा पेड़ों को,साथ देंगे तुम्हारा
तेरा मेरा कभी न होगा, पेड़ो बिना गुजारा
हाथ बढ़ा दे इन्हे बचा ले,करते तुझे इशारा
समस्त ब्रह्मांड में मानव,तुझे ही बस पुकारा।।
© सीमा रंगा इन्द्रा
આલેખન ખૂબ સરસ 💐, આપ મહોદયશ્રીને ખૂબ ખૂબ અભિનંદન 🌹
ReplyDeleteवाह सीमा जी
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