Thursday, June 27, 2024

मां बाप : रमापति मौर्य


मां बाप 
घर -घर में भगवान बसे, 
 क्यों दर-दर ढूंढा करता। 
 हरिद्वार -काशी -प्रयाग, 
 क्यों मूरख भटका करता है।।१।।

 मक्का और मदीना,काबा, 
 चैन नहीं दे पायेंगे। 
 जिसके माता-पिता दुखारी, 
 निष्फल सब हो जायेंगे।।२।। 

चार धाम चौरासी कोश की, 
 परिक्रमा निष्फल होगी। 
 ईश से बढ़ मां-बाप तुम्हारे, 
 अगर नहीं पूजा होगी।।३।।

 साक्षात् भगवान तुम्हारे, 
 फिर भी भटका करता है। 
 सारी दौलत पास तुम्हारे, 
 पाई-पाई को मरता है।।४।।
© रमापति मौर्य

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