मन भावन रात अंधियारी,
चन्दा चकोरी है बहुत दूरी है,
चन्द्रप्रभा मे आकाश जरूरी है।
चंचल किरणों की श्वेत आभा,
देखी है इसकी अथाह प्रभा...।।
मन भावन रात अंधियारी,
लट घूँघराले है बिखराती।
रात्रि अंधियारी है मुस्काती,
स्वप्न प्रभा मे हमें ले जाती...।।
नाविक अपनी नाव के सहारे,
सागर की लहरें हिलोरें मारे।
आकाश मे टिम - टिमाते तारे,
सारे जगमग हो गये सितारे...।।
चन्द्रमा की किरणें है पड़ती,
चंचल मन को है जकड़ती।
देख अथाह प्रेम की छाया,
चकोर चकोरी का मिलन है आया...।।
पेड़ों की झुरमुटों मे लिपटें,
एक - दूसरे के प्रेम मे झिपटे।
अति प्रेम की है ऐसी काया,
सारे जगत की यही है माया...।।
मोती रूपी बून्दे लिए..,
आकाश मे तारें है चमकते।
प्रेम की कल्पना लिए..,
बिछड़ने से प्रेमी है बिलखते...।।
-- अन्जू परिहार
शाहजहांनाबाद, भोपाल (मध्यप्रदेश)
दिनांक - 19/06/2024
No comments:
Post a Comment