Saturday, June 29, 2024

शिक्षा और संस्कार : वर्षा शिवांशिका

शिक्षा और संस्कार 


शिक्षा ज्ञान का भंडार ,
अज्ञान हरने का आधार। 
मानो जीवन का उपहार, 
निहित हो इन में संस्कार I

शिक्षा और संस्कार का अनुभव ,
सर्वप्रथम कहो ,मातृदेवो भव:, 
पितृदेवो भव:,आचार्य देवो भव:,
सीखो कहना अतिथि देवो भव: I

आदि ,विद्यारंभ,उपनयन, 
अनंत,वेदारंभ,समवर्तन, 
शिक्षा और संस्कार मिलन ,
यही जीवन का दिव्यदर्शन I

गर केवल हो शिक्षा ज्ञान ,
व्यर्थ उसका सभी संज्ञान ,
पशु सम संस्कारहीन जीवन,
समाज में केवल बाजारी करण I

क्या मंतव्य केवल धनार्जन ?
है क्या यह स्वच्छ वातावरण ?
यही से होता क्या भ्रष्ट आचरण ?
कैसे होगा कहो देश कल्याण ?

सबसे यही है प्रथम आगास ,
यही हो जन-जन का प्रयास,
शैक्षिक संस्कार का हो आवास ,
जिससे हो चहुंमुखी विकास।

© वर्षा शिवांशिका

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